Saturday, 8 April 2017

Ek Kahani Ye bhi. (Not related to Kashmir)

व्यंग कथा विचारणीय ( इस कथा को कश्मीर और उसके आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नही ह, पर कोई इस कथा को उससे जोड़कर देखे तो मात्र यह संयोग है )

 एक बार मेरे कमरे में 5-6 सांप घुस गए। मैं परेशान हो गया, उसकी वजह से मैं कश्मीरी हिंदुओं की तरह अपने ही घर से बेघर होकर बाहर निक ल गया।
इसी बीच बाकी लोग जमा हो गए। मैंने पुलिस और सेना को बुला लिया।
 अब मैं खुश था कि थोड़ी देर में सेना इनको मार देगी तभी कुछ पशु प्रेमी और मानवतावादी आ गये, बोले की नहीं आप गोली नहीं चला सकते, हम पेटा के तहत केस कर देंगे। सेना वाले उसको ढेला मारने लगे, सांप भी उधर से मुंह ऊँचा करके जहर फेंकने लगे। एक दो सांप ने तो एक दो सैनिक को काट भी लिया पर भागे नहीं।

 फिर इतने में कुछ पडोसी मुझे ही बोलने लगे, क्या भाई तुम भी बेचारे सांप पर पड़े हो, रहने दो , क्यों भगा रहे हो ? उधर प्रशासन ने खबर भिजवा दिया, सांप के मुंह में जहर नहीं होना चाहिए, उसके मुंह में दूध दे दो तो वो मुंह से जहर की जगह दूध फेंकेगा। ..... मैं हैरान परेशान...
 फालतू में बात का बतंगड़ हो चुका था। न्यूज़ भी चलने लगे थे। एनडीटीवी के रविश ने कह दिया कि सबको जहर नजर आता है सांप नजर नहीं आता, उसकी भी जिंदगी है। बरखा दत्त चीख़ कर कहने लगी की ये तो भटके हुए संपोले हुए हैं, मकान मालिक इनको बेवजह परेशान कर रहा है, मकान मालिक को चाहिए की वो इनको अपने घर में सुरक्षित स्थान पर इनको बिल बनाकर रहने दे और इनके खाने पिने का भरपूर ध्यान रखे।

 इसी बीच एक सैनिक ने पेलेट गन चला दिया और एक सांप ढेर हो गया, मुझे आशा जगी, सेना ही कुछ कर सकती है, तभी भाँड मीडिया ने कहा, पेलेट गन क्यों चलाया, सांप को कष्ट हो रहा है, अभी कोई कुछ सोचता उससे पहले ही हाइकोर्ट का भी फैसला जाने कहाँ से आ गया कि सांप पर पेलेट गन नहीं चला सकते इस गन से उसकी आँखे और चेहरा ख़राब हो सकता है।

 उधर आम आदमी पार्टी ने कह दिया कि वहाँ जनमत संग्रह हो कि उस घर में सांप रहेगा या आदमी। कुल मिलकर सांप को जीने का हक़ है इस पर सब एकमत हो गए थे।

 इतने में जो मेरा पडोसी मेरा घर कब्ज़ा करना चाहता था वो सांप के लिए दूध, छिपकली और मेढक लेकर आ गया, उसको खिलाने लगा, उसकी मदद बुद्धिजीवियों, मानवातावादियो और पत्रकारों ने कर दी और पडोसी को शाबाशी दी। मैं निराश होकर अब दूर से सिर्फ देखता था।
 काश मैंने खुद लाठी लेकर शुरू में ही इन सांपो को ठिकाने लगा दिया होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ता।
Please do not relate with situation of Kashmir.

 Reviews are heartily Welcome.

Samved Singh Vishen
09958188210

Friday, 7 April 2017

Muslims in India. Problem or Progress?

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
पता नहीं  बार बार ये सवाल आता है।
कयूं है दुनिया में शोर ऐसा
कयूं न दीखता किसीको भोर ऐसा ।
कयूं है हम आपस में दूर इतना
देखो है हम्मे नफरत कितना।
I feel so much distance in between Muslims and Sanatan Dharm mostly called Hindus.
I need to know Why??? I know everyone needs to know why?
We are living together. Muslims contribute 14% of country Population. Nearly 60-80% of their population live in poverty.
So I pointed out some questions related to their community.

1. Why Muslims don't feel themselves as Indian?
2. Why they cannot accept the rituals of any other religions.?
3. How healthy relationship they had with other religions in India and outside India.?
4. What they really need ?


1.. Why Muslims don't feel themselves as Indian?

Reason of making such questions is based on whatever I saw once during cricket match B/w India & Pakistan. Cheers for Pakistan in Muslim colony raises so many doubt on them.
I felt such things so many times personally in Delhi in my hometown near Ayodhya, we had oppose and tried to convince some Muslims that they are doing wrong. They should support our nation and nation is first. Some of them were not interested to listen your views some pretend them to understand us but really they do not.
I feel disappointed every time I saw such things.

2.. Why they cannot accept the rituals of any other religions.?

Main problem is they are not happy with as Bharatiya they feel safogated if I greet them by saying Jai Shri Ram.
Whereas I don't have such problem when they greet us by saying "Salam al e Gum"
Not with only Hindus they have problem when with Christens and other.
One more thing they are not aware of reality or you can say they cannot choose in between right or wrong. They choose what their Molivi told them.
Why????
Most of the molvies and preachers in Muslim community are illiterate but they are able to misguid Educated Muslim in the name of Allah or in the fear of community abolition.

3..How healthy relationship they had with other religions in India and outside India.?
In India they pretend to live as Indian but they prefer their community first then nation. This is a reason that they don't have healthy relation with any other religions in all over the world.
Rise of feud on the basis of religion in France Germany Australia US too.

4.. What they really need?

They need education then employment. It's  means most of them wasted their money in wrong way due to lack of proper education.
Their madarsa should run properly and education must spread equally in males and females.
Education is only way by which they will be able choose B/w right and wrong.

**Conclusion
I had feel Muslims are two types one is really Soooo Good and Other is soo Bad.
Mandir Majjid is matter of understanding not for riots. Be in peace.
Thanks for reading.
Your comments are valuable.

Samved Singh Vishen
09958188210

https://mobile.twitter.com/Samved_91


Friday, 24 June 2016

इस्लाम शांति का प्रतीक है : कैलाश सत्यार्थी 7th june 2016

 Kailash Shatyarthi Novel Prize Winner
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने इस्लाम को शांति का प्रतीक बताया है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों से शरणार्थियों को अपनाने की अपील की है। सीरिया और इराक में खूनी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग पश्चिमी खासकर यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए जा रहे हैं। कैलाश सत्यार्थी को मलाला यूसुफजई के साथ वर्ष 2014 में संयुक्त रूप से नोबेल का शांति पुरस्कार दिया गया था। साइप्रस के एक किशोर के सवाल पर सत्यार्थी ने सोमवार को कहा, “इस्लाम का मतलब शांति है। कुरान में शांति, न्याय, स्वतंत्रता और समानता के सैकड़ों संदर्भ इस्लाम की छवि धूमिल करने वाली कुछ घटनाओं आम नहीं माना जाना चाहिए।” दरअसल, पश्चिमी देशों को शरणार्थियों की आड़ में आतंकियों के घुसने की आशंका है। सत्यार्थी ने इस धर्म को बदनाम करने की कोशिशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं, कोई बच्चा शरणार्थी नहीं बनना चाहता है।

Samved Singh:
My Question over his statement is how can Peace will be established when Islamic countries itself interesting in doing war all the time for last 1000s of year.
For last 1500years we have constant proof of history of breaching peace on the name of Islam or Islamic rights. No one Muslim Care about whatever the Holy Quran Consist, most of them Don't care. 

Reader's comment is highly appreciable.